Tuesday, 14 March 2017

महिला स्वालंबन ,आवश्यकता है मानसिकता में परिवर्तन की ....................



उसकी आँखों से छलकते आंसू बता रहे थे की वो अंदर से कितनी दुखी है और दुखी हो भी क्यों न आखिर कौन सी औरत पूरा दिन खट कर कमाने के बाद अपनी सारी कमाई अपने पति को इस डर से सौप देंगी की अगर नहीं दिया तो  उसकी पिटाई लात जूतों से हो जाएगी।  ये एक दिन का भी किस्सा नहीं है कि  चलो इसे भुला दिया जाये । रोज ही शराब पीकर पत्नी को अपने पाँव  की जूती समझ कर उसे प्रताड़ित करना उसकी  दिनचर्या का हिस्सा है.  वो  भली -भांति जानता है की उसकी पत्नी  का साथ देने के लिए उसके  माता -पिता  हैं नहीं  और न ही  उसके पास आर्थिक  निर्भरता  क्योंकि पत्नी की पूरी कमाई पर उसका कब्ज़ा है .  इस परिस्थिति में उसे छोड़कर  वो कैसे जा सकती  है ,  उसके पास सर छुपाने के लिए कोई दूसरी छत है ही नहीं। छत एक  महिला  के लिए कितनी आवश्यक है ये वही बता सकती है जो उसके आभाव में मर -मर कर जी रही है।   ऐसी एक नहीं सैकड़ो महिलाये है जो समाज की नजर में अपने पैरो पर खड़ी   है किन्तु घर की चहारदीवारी में बेबस नारी है। नारी की मानसिक ,शारीरिक प्रताड़ना की  एक नहीं अनेको आपबीती है ,  कुछ लड़कियां सुबह पाँच बजे से रात के दस बजे तक कही फुल टाइम तो कही पार्ट टाइम कार्य करती है ताकि वो अपनी शादी के लिए कुछ रूपये इकट्ठे कर सके और  अपने सपनों में रंग भर सके उसके बाद भी उन्हें  अपने माता -पिता, भाई -बहनो  से सुनना पड़ता है कि  मेमसाहिबा के पास घर के कार्यो में हाथ बटाने का  समय ही नहीं है।    सैकड़ों लड़कियां ऐसी  भी है जो  अपने को आर्थिक निर्भर बनाने के लिए बसों ,लोकल ट्रेनों में लटक कर ,खड़े हो कर , मजनुओ के फिकरे सुनते हुए सफर करती है कभी मज़बूरी वश तो कभी अपनी मर्जी से जिंदगी जीने की इच्छा वश।  नारीसशक्तीकरण के दौर में हर लड़की की चाहत है की वो नौकरी करे।  नौकरी मिलने के बाद घर बसाना उसके बाद पति ,बच्चे उनकी जिम्मेदारियां। छोटे   बच्चे को आया के भरोसे छोड़कर  नौकरी करने वाली महिला भी कुंठाग्रस्त है की अगर वो नौकरी छोड़ देंगी तो उसे अपने पति और उसके घरवालों के रहमोकरम पर जीना होगा और अगर नौकरी जारी रखती है  तो उसके मासूम बच्चे के साथ उसकी पीठ पीछे आया क्या कर रही  होगी । अगर घर में सास- ससुर है तो बच्चों की तरफ से मुक्त रहती है किन्तु घर जाकर उनके लिए खाना भी पकाना है क्योंकि वे बाहर का बना खाना नहीं खाएंगे । नौकर रखती है तो ऑफिस से लौटने के बाद सास की दस शिकायते तैयार मिलती है। देर से आती है तो तानों की बौछार मिलती है।पत्नी या बहु का कार्य किसी को दिखाई नहीं देता उसकी थकान  , उसकी पीड़ा इससे किसी को कोई लेना देना नहीं क्योंकि घर के कार्य औरत ही करती है वो तो पुरुष कर नहीं सकता भले ही दोनों एक ही आफिस में एक ही पोस्ट पर कार्यरत   हो।  ये  कड़वी सच्चाई  निम्न मध्यम वर्ग और मध्यम वर्ग के साथ अधिक जुडी है।       एक तरफ नारी को सशक्त बनाने के लिए आये दिन नए कानून ,नयी योजनाए तैयार होती है दूसरी तरफ पुरुष प्रधान मानसिकता ज्यों की त्यों रहती है।   औरतो की सफलता और  उन्हें सशक्त बनाने  लिए बने कानून का जब कभी कोई महिला दुरूपयोग करती है तो पुरुष समाज समस्त नारियों को एक ही लाठी से हाँकने लगते है बिना विचारे की आज भी बाल विवाह जैसी कुप्रथा को पूर्ण रूप से रोका नहीं जा सका ,दहेज प्रथा अभी भी कितनी कोमल नारियों को शारीरिक मानसिक कष्ट दे रही  है उन्हें अग्नि के हवाले कर रही है।   जो भी हो नारी सशक्तिकरण की दौड़ में रोबोट बनी महिला तब तक सुखी नहीं हो सकती जब तक की बेटो को पुरुष के झूठे अहम् से बाहर नही निकालती उन्हें ये नही सिखाती की उसकी पत्नी भी एक इंसान है वो भी बाहर काम करके थक जाती होगी।  घर के छोटे -मोटे कामों में मदद करना सम्मान के विरुद्ध नहीं है क्योंकि घर उनका भी उतना ही है जितना की पत्नी का। जिस दिन स्त्री -पुरुष की सोच में बदलाव आ जायेगा उसी दिन समाज भी परिवर्तित हो जायेगा. 


Thursday, 6 March 2014

South Trip.

भ्रमण दक्षिण भारत का 

 तिरुपति भगवन के मंदिर जाने का रास्ता ।
 यहाँ से बाईस किलोमीटर की दूरी , पहाड़ो को काटकर रास्ता बनाया गया है । 

  तिरुमाँला (तीन पर्वतो के मिलन को तिरुमाला कहते है )
तिरुपति के चेकिंग पॉइंट से तिरुपति बालाजी का मंदिर दिखायी देता है।  

चेकिंग पॉइंट पर ट्रैफिक  जाम 

तिरुपति में भीमा पैराडाइस होटल  के सामने
चेकआउट करने के बाद 

मदुरई  जाने की तैयारी 

तिरुपति में  पद्मावती मंदिर ,
कहते है बालाजी के दर्शन के बाद माँ लक्ष्मी के दर्शन करना आवश्यक है 

 तिरुपति में  पद्मावती मंदिर ,



गुमनाम रास्ता ,शहर के जाम से बचने के लिए ड्राईवर ने ये रास्ता चुना 



रास्ते में मूंगफली और फल बेचती महिला 


यात्रा में सहयोगी "थ्री इडियट"  



एकाम्बरेश्वर शिव मंदिर  ( कांचीवरम् )The temple is the largest temple in the town of Kanchipuram and is located in the northern part of the town.[2] The temple gopuram(gateway tower) is 59m tall, which is one the tallest gopurams in India.[3] It is one of the Pancha Bhoota Stalamsrepresenting earth (Sanskrit: पन्च भूत स्थल) referring to the five temples,[4]dedicated to Shiva, a Hindu god, each representing the manifestation of the five prime elements of nature- land, water, air, sky and fire.[5]


हाईवे  मार्ग 
हाई वे ऑफ  साउथ 

यहाँ अच्छा खाना पूर्ण स्वच्छता के साथ मिलता है  

मदुरई के  होटल महाराजा में विश्राम के क्षण 




 मीनाक्षी देवी का भव्य मंदिर 

 मीनाक्षी देवी मंदिर के सामने 


 मदुरई शहर 

  मदुरई शहर 



रोड से  जाने  वालो के लिए
समुद्र के ऊपर रामेश्वरम में पम्बन पुल बनाया गया  है 


 समुद्र के ऊपर ही ट्रैन के लिए पुल बनाया गया जिसे पम्बन पुल कहते है 

खूबसूरत दृश्य का आनंद उठाते हुए 


दक्षिण भारत की   हिंदी  




 धनुष्कोडी के मार्ग पर 


मेरे प्यारे दोस्त एक गोरा एक काला 

धनुष कोडी में सूर्य अस्त का दृश्य 

धनुष्कोडी की समुद्री रेत के बीचोबीच मीठे पानी का कुआ 














विवेकानंद रॉक ( कन्याकुमारी) 








कन्याकुमारी के विवेकानंद स्थल पर 

















Nagaraja Temple (TamilNaga (serpent) + Raja (king)) 


Nagaraja Temple (TamilNaga (serpent) + Raja (king)) is a Hindu temple dedicated to the god Nagaraja situated at the heart of Nagercoil. The name for the town Nagercoil originated from this temple. The temple is full of images of snakes. In addition, the gatekeepers of the sanctums are two snakes.


चालीस रूपये प्रति ग्लास दूध और दस रूपये प्रति हल्दी का पैकेट। 
यहाँ हल्दी और दूध चढाने का रिवाज है ।
छोटा सा मंदिर चारो  ओर सांपों की प्रतिमाये ,बीचो-बीच गणेश जी विराजमान है । 
केरल का साफ-सुथरा सुप्रसिद्ध  कोवलम बीच 
मछुआरे मछली पकड़ रहे है 
केरल का  लोकप्रिय बैक वाटर